
आदमी में काबलियत हो तो रोजगार के अवसर मिल जाते हैं। हां रोजगार के अवसरों में समय के हिसाब से बदलाव होता रहता है। अभी चुनावी मौसम है और जमाना हाइटेक, लिहाजा चुनाव लडऩे के दावेदारों की सोशल मीडिया पर निर्भरता बढ़ गई है। कुछ दावेदारों को इस काम में महारत हासिल नहीं हैं, इस कारण वो यह काम अनुबंध पर करवाने लगे हैं। बाजार में इस तरह के काम करने वाले काफी हैं। वो दावेदारों को सोशल मीडिया के माध्यम से न केवल प्रचार के तरीके बताते हैं बल्कि दावेदारों के जनसंपर्क का कवरेज तक भी करते हैं। दावेदारों की खबर बनाकर उनके पेज पर वायरल करने का काम भी यही संभालते हैं।

शहर के एक नेताजी का इन दिनों सोशल मीडिया पर प्रचार देखकर ऐसा लगता है मानो टिकट उनको ही मिलने वाली है। अपनी तमाम तरह की गतिविधियों को यह नेताजी बढा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। इतना ही नहीं है आजकल सोशल मीडिया पर अपने नाम से एक पेज भी बना लिया है, उसके अंदाज से देखकर लगता है कि नेताजी ने खुद को विधायक के लिए मानसिक रूप से तैयार कर लिया है, हालांकि यह नेताजी विधायक का चुनाव लडऩे की बात कई बार नकार चुके हैं लेकिन सोशल मीडिया पर उनका अंदाज देखकर यह जाहिर होने लगा है कि उन्होंने पूरा मानस बना लिया है। बहरहाल, देखने की बात यह है कि नेताजी को टिकट मिलती है या नहीं?

मुख्यमंत्री की गौरव यात्रा के श्रीगंगागनर जिले में प्रवेश में अभी वक्त है लेकिन तैयारियां शुरू हो गई हैं। जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी उनकी यात्रा संबंधी तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। व्यवस्थाएं चाक चौबंद की जा रही हैं। कहीं किसी तरह की चूक न रह जाए, इसका विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन के सब के बीच जगह-जगह टिकट के दावेदारों में बधाई संदेश देने की होड़ लगी है। पोस्टर बैनर टांगे जा रहे हैं, शहर व कस्बे बदरंग हो तो हों, कौन रोके और कौन टोके। इतना जरूर है कि इन बधाई संदेशों के कारण होर्डिंग्स व बैनर बनाने वालों का धंधा जरूर चमक गया है। चुनाव से पहले बैठे बिठाए काम जो मिल गया है।

यह विभाग रोशनी वाला है लेकिन इसके संचालन में इस तरह की खामियां हैं कि इसको 'अंधेर नगरी' कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं। यह विभाग हमेशा बिजली सुधार के दावे करता है, निर्बाध आपूर्ति देने की भी बात करता है लेकिन हालात इससे ठीक विपरीत हैं। शहर में सामान्य दिनों में रात या दिन को कट लगना आम बात है। इससे भी बड़ी बात इस निगम के अधिकारियों का व्यवहार बड़ा अजीब है। कोई उपभोक्ता अपनी तकलीफ भी बताता है कि यह तो इसको गंभीरता से नहीं लेते। इससे अच्छा तो जोधपुर से संचालित एक नंबर पर कोई उपभोक्ता अपना दर्द बयां करता हैं तो संतोषजनक जवाब भी मिलता है। इधर श्रीगंगानगर के अधिकारी तो उपभोक्ताओं के नंबर ही ब्लॉक कर देते हैं।

मुख्यमंत्री खुद चलकर इलाके में आ रही हैं तो संभावित दावेदारों के पास इससे बढिय़ा मौका और होगा भी क्या? यह यात्रा चूंकि चुनाव से पहले निकाली जा रही है। इस कारण टिकट के दावेदारों में होड़ लगी है। स्वाभाविक से बात है दावेदार कितने ही हों अंत में टिकट तो एक को मिलनी है। फिर भी मुख्यमंत्री की नजरों में खुद को इक्कीस साबित करने के प्रयास में संभावित दावेदार जी जान से जुटे हुए हैं। जनसंपर्क और सम्मेलन के बहाने दिन रात एक कर रखा है। अपनी तरफ से वे कोई प्रयास नहीं छोड़ रहे। दावेदारों का पूरा प्रयास है कि वे मुख्यमंत्री के सामने अपने समर्थकों के साथ मुलाकात के बहाने शक्ति प्रशर्शन कर अपना दावा पुख्ता करें।

यह मुख्यमंत्री के पगफेरे का ही कमाल है कि श्रीगंगानगर शहर के धीमी गति से चल रहे कामों में हलचल दिखाई देने लगी है। सड़कों के गड्ढे ठीक होने लगे हैं। सफाई व्यवस्था को भी दुरुस्त करवा जा रहा है। इतना ही नहीं है कई जगह तो रातोरात सड़क बनाने का काम तक चल रहा है। यूआईटी के पास रोड डेढ़ साल से खुदी रही लेकिन किसी ने खबर तक नहीं ली, लेकिन अब युद्ध स्तर पर इसको बनाया जा रहा है। इसी तरह यूआईटी से जिला अस्पताल की रोड एक माह से बंद पड़ी है। यहां से चौपहिया वाहन नहीं गुजर रहे हैं। देखते हैं जिम्मेदारों की नजर इस बंद रास्ते पर भी पड़ती है या आधा अधूरा सच दिखाकर ही वाहवाही बटोरी जाएगी।
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राजस्थान पत्रिका के श्रीगंगानगर संस्करण के 6 सितम्बर 18 के अंक में प्रकाशित ।
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